Dr. Satyapal Singh Heart diseases & B.P./ 2025-06-30 601
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क्या आप जानते हैं, बी पी नापने के दौरान होने वाली यह गलतियां आपके पूरे जीवन पर भारी पड़ सकती है और आपको पूरे जीवन भर इसका भुगतान करना पड़ सकता है। आईए जानते हैं……
जब भी कभी डॉक्टर या नर्स के द्वारा आपका ब्लड प्रेशर नापा जाता है तो 63 परसेंट तक चांसेस होते हैं कि वह बीपी की रीडिंग गलत होगी।
इसीलिए कभी भी एक बार में नापे गये बीपी के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। कम से कम अपना बीपी तीन बार नपवाने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।
क्लीनिक या हॉस्पिटल के बजाय घर पर आरामदायक स्थिति में नापा गया बीपी ज्यादा सही होता है।
जब भी डॉक्टर आपका बीपी नापता है और एक नर्स आपका बीपी नापती है तो डॉक्टर की ब्लड प्रेशर की रीडिंग हमेशा नर्स की रीडिंग से ज्यादा आती है।
ऐसा इसलिये होता है, क्योंकि मरीज डॉक्टर के सामने अपनी बीमारी को लेकर थोड़ा घबराया हुआ सा या चिंतित रहता है। जबकि एक पैरामेडिकल स्टाफ यानि नर्स के सामने वह थोड़ा आरामदायक स्थिति में रहता है। तनाव कम होने की वजह से बीपी कम आता है।
इसलिये, डाक्टर के वजाय, नर्स या दूसरे पैरामेडिकल स्टाफ से बीपी नपवाना फ़ायदेमन्द होता है और आप अनावश्यक रोगी होने से वच सकते हैं।
जब आप किसी भी बीमारी के लिए किसी डॉक्टर के यहां दिखने जाते हैं और बीपी नापने पर आपका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (बीपी की ऊपर वाली रीडिंग) यदि 130 mm Hg आती है, तो दूसरी बार जाने पर 14 परसेंट चांस होता है कि आपका बीपी 140 mm Hg हो जाएगा और 10वीं बार जाने पर 64 परसेंट चांस होता है कि आपका बीपी 140 mm Hg हो जाएगा. इसीलिए जब आप डॉक्टर के यहां किसी दूसरे रोग के इलाज के लिए जाते हैं और अगर आपका बीपी हाइ आता है तो आप डरे नहीं, घबराएं नहीं, घर पर आरामदायक स्थिति में लेट कर बीपी नपवाएं और ऐसी स्थिति में नापा गया बीपी ही सही होता है. इसीलिए जागरूक रहें और स्वस्थ रहें.
बीपी नपवाने के दौरान इन सभी तथ्यों को ध्यान मे रखकर ही बीपी नपवायें और स्वस्थ रहें।
Source of this article: The BMJ.
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